तभी तो नोटा लोकतंत्र का प्रहरी हैं
आज नोटा के कारण पार्टियों हाहाकार मचा हुआ हैं तीसरी शक्ति के रूप में उदय हुआ नोटा की ताकत को समझने की जरुरत हैं जिससे स्वार्थी पार्टी के भ्रष्ट नेताओ को सबक सिखा सकते हैं इसी कारण नोटा लोकतंत्र का प्रहरी हैं मध्य प्रदेश,राजिस्थान, छत्तीसगढ़,तेलंगना और मिजोरम में नोटा के कारण पार्टियाँ 51 सीट हारी हैं जिसकी चर्चापूरे देश में हो रही हैं
हमारे देश के सविधान ने नियम 49-O के तहत यह अधिकार नापंसंदी का दिया हुआ हैं जिसके कारण पार्टियाँ मजबूर होंगी अच्छे योग्य प्रत्याशियों को टिकिट देने के लिए और राजनिति में स्वछता आएगीI नोटा लोकतंत्र का वो प्रहरी है जो हमेशा सत्ताधारियों पे अंकुश लगाएगा और विरोध में प्रयोग होगा...इसे और धारदार बनानेंके लिए "राईट-टू-रिजेक्ट" बनवाना होगा...यानि #NOTA को सबसे अधिक वोट मिलनें पर चुनाव खारिज हो जाये...
जैसे – हरियाणा निकाय चुनाव और महाराष्ट्र में नोटा को राइट टू रिजेक्ट का अधिकार मिला हैं उसी तरह पूरे देश में नोटा राइट टू रिजेक्ट बने तभी देश में राजनीति सुधार आएगा इसके लिए चुनाव आयोग से जनता ने अपील आन्दोलन करने की जरुरत हैंलोकतंत्र का प्रहरी हैं.................